1. टैली प्राइम में पेरोल मैनेजमेंट क्या है?
पेरोल मैनेजमेंट यानी कर्मचारियों की कमाई, भत्ते, कानूनी कटौतियाँ (पीएफ, ईएसआई, प्रोफेशनल टैक्स, टीडीएस), अटेंडेंस और मासिक सैलरी भुगतान की पूरी प्रक्रिया। टैली प्राइम में यह सब सीधे अकाउंटिंग से जुड़ा होता है — सैकड़ों कर्मचारियों की पे-स्लिप सेकंडों में तैयार हो जाती हैं।
2. पेरोल सेटअप का स्टेप-बाय-स्टेप तरीका
स्टेप 1: पेरोल फीचर ऑन करें (F11)
F11: Features दबाकर "Maintain Payroll" को Yes करें। अगर कंपनी में पीएफ/ईएसआई जैसी कटौतियाँ लागू हैं तो "Enable Payroll Statutory" भी Yes करें।
स्टेप 2: कर्मचारी ग्रुप और कर्मचारी बनाएँ
Create > Employee Groups में विभाग बनाएँ (अकाउंट्स, सेल्स, ऑपरेशन्स)। फिर Create > Employees में हर कर्मचारी का ब्योरा भरें — जॉइनिंग डेट, बैंक अकाउंट व आईएफएससी, पैन, आधार और पीएफ/ईएसआई नंबर।
स्टेप 3: अटेंडेंस और प्रोडक्शन टाइप बनाएँ
- उपस्थित (Present): सवेतन अवकाश वाली उपस्थिति
- अनुपस्थित (Absent): बिना वेतन का अवकाश
- ओवरटाइम: घंटों में मापा जाने वाला प्रोडक्शन यूनिट
स्टेप 4: पे हेड्स (सैलरी के हिस्से) बनाएँ
- बेसिक सैलरी: कर्मचारी की कमाई (अटेंडेंस या फ्लैट रेट आधारित)
- एचआरए (मकान किराया भत्ता): गणना या प्रतिशत आधारित कमाई
- कन्वेयंस व स्पेशल अलाउंस: कर्मचारी की कमाई
- पीएफ (कर्मचारी हिस्सा 12%): कानूनी कटौती
- ईएसआई (0.75%): कानूनी कटौती
स्टेप 5: सैलरी स्ट्रक्चचर बनाकर पेरोल प्रोसेस करें
हर कर्मचारी या ग्रुप के लिए सैलरी स्ट्रक्चर तय करें (बेसिक + भत्ते − कटौतियाँ)। फिर हर माह अटेंडेंस एंट्री के बाद Payroll Voucher से पूरे वेतन की एंट्री एक साथ करें — पे-स्लिप अपने आप बन जाती हैं।
3. पेरोल सीखने से क्या फायदा?
- सीए फर्म और कंपनियों में पेरोल अकाउंटेंट की अलग माँग है — सिर्फ बिलिंग नहीं, सैलरी भी संभाल सकें।
- छोटे कारखानों/दुकानों के लिए पार्ट-टाइम पेरोल सेवा देकर कमाई।
- टैली एडवांस कोर्स में पेरोल + जीएसटी साथ सीखने पर सैलरी स्लैब सबसे ऊपर जाता है।
🚀 प्रैक्टिकल तरीके से सीखना चाहते हैं?
श्री कंप्यूटर एजुकेशन में जुड़ें — 100% हैंड्स-ऑन प्रैक्टिकल ट्रेनिंग, रियल प्रोजेक्ट्स और सरकारी मान्यता प्राप्त सर्टिफिकेट!
संपर्क करें / एडमिशन लें